Friday, November 29, 2013

सनातन संस्कृति संघ

सनातन संस्कृति संघ एक गैर सरकारी, सामाजिक, आध्यात्मिक ट्रस्ट हैं। इसका मुख्य उद्देश्य भारत व सनातन संस्कृति की रक्षा एवं सम्वर्द्धन करना तथा सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक व आध्यात्मिक सभी प्रकार की व्यवस्थाओं का परिवर्तन कर स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली एवं संस्कारवान भारत का पुनर्निर्माण करना हैं। इसका पंजीकृत कार्यालय भारतवर्ष की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के करावल नगर में स्थित हैं । यह संगठन संसार के जन कल्याणार्थ मानवीय, नैतिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों को निजी, व्यवसायिक तथा सार्वजनिक जीवन में बढ़ावा देने के लिए कार्यरत हैं।
यह संगठन जिन क्षेत्रों में शिक्षायें एवं प्रशिक्षण दे रहा हैं, वे है- धर्मतंत्र जागरण, राष्ट्र जागरण, मूल्यनिष्ठ शिक्षा, चरित्र निर्माण, आपदा प्रबन्धन, विश्व-बंधुत्व, सम्पूर्ण स्वास्थ्य, स्वदेशी स्वाभिमान, गौवंश एवं ग्राम आधारित अर्थतंत्र की व्यवस्था, पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जागृति, व्यक्तित्व विकास, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक पुनर्निर्माण, नशीले पदार्थो से मुक्ति, अन्धविश्वास एवं कुप्रथा निवारण, सकारात्मक चिंतन, वैज्ञानिक- आध्यात्मिक अनुभूति तथा जीने की कला।

सनातन संस्कृति की रक्षा व सम्वर्द्धन की दिशा में हमारे वैयक्तिक व संगठनात्मक दायित्व

सनातन संस्कृति संघ के द्वारा वैभवशाली व शक्तिशाली भारत, विश्वगुरू भारत एवं विश्व की महाशक्ति के रूप में भारतवर्ष की सनातन संस्कृति को पुनः प्रतिष्ठित करने या आर्यावर्त देश को सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक व आध्यात्मिक रूप से विश्व के एक आदर्श राष्ट्र में स्थापित करने के लिए हमारी दो कार्ययोजनाएं है । एक देश की आध्यात्मिक उन्नति तथा दूसरी आर्थिक उन्नति । दोनों प्रकार की उन्नति का आधार है स्वस्थ शरीर व स्वस्थ मानसिकता । राष्ट्र का नैतिक, चारित्रिक व आध्यात्मिक विकास करने में हम पूर्ण स्वतंत्र और ये तो हमें पूर्ण पूरूषार्थ से करना ही हैं । इसके लिए संगठन की पाँच सूत्रीय योजना निम्नलिखित हैं:-

(क) शिक्षा व्यवस्था - 1. हम योग आदि प्राचीन भारतीय विद्याओं का क्रियात्मक व व्यवहारिक प्रशिक्षण विद्यालयों में जाकर देंगे तथा बच्चों के मन में बचपन से ही अपने देश की राष्ट्रभाषा, मातृभाषा एवं संस्कृतभाषा, स्वदेशी भोजन, औषधि, संगीत व अभिवादन, संस्कृति एवं संस्कारों के प्रति आत्म गौरव का भाव जागृत करेंगे एवं भारत के गौरवशाली स्वर्णिम अतीत के बारे में बच्चों को बताकर उनमें स्वाभिमान का भाव भरेंगे ।

2. मूल्यों पर आधारित संस्कारों के साथ भारतीय भाषाओं में सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था बनानी है । विज्ञान, गणित, तकनीकि, प्रबंधन, अभियांत्रिकी, चिकित्सा व प्रशासकीय आदि सभी प्रकार की शिक्षा राष्ट्रभाषा व अन्य प्रादेशिक भारतीय भाषाओं में ही होनी चाहिए । इस सम्पूर्ण व्यवस्था को हम क्रमबद्ध तरीके से लागू करवायेंगे । ऐसा होने पर एक गरीब मजदूर व किसान का पुत्र - पुत्री भी डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, आई.ए.एस, आई.पी.एस. व ऑफीसर बन सकेगे व देश के सभी लोगों को समान रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिल सकेगा ।

3. विद्यालयों में चरित्र निर्माण शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा व सैन्य शिक्षा अनिवार्य करायेंगे ।

4. भारत में चल रही शिक्षा पद्धति का प्रारूप 200 वर्ष पूर्व टी. बी. मैकाले द्वारा भारत को सदियों तक गुलाम रखने के लिए किया गया था । मैकाले इस सत्य को भली - भांति जानता था कि हीन चरित्र के लोग कभी भी उच्च चरित्र के लोगों को गुलाम नहीं बना सकते । मैकाले जानता था कि भारत में लागू की गई अंग्रेजी शिक्षा पद्धति से पढ़कर निकलने वाले विद्यार्थी रंग, रक्त व शरीर से भारतीय और विचार, आचरण, मान्यताओं व आत्मा से अंग्रेज हो जायेगें । मैकाले द्वारा निर्मित भारत की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में भारतीयों के स्वाभिमान व आत्मसम्मान को नष्ट करने के लिए तथा देश के बच्चों का नैतिक व चारित्रिक पतन करने हेतु हम भारतीयों के मन मस्तिष्क में बचपन से ही अपने पूर्वजों के ज्ञान, जीवन व चरित्र के बारे में एक षड़यन्त्र के तहत झूठी, मनगढंत, निराधार व अपमानजनक बातें पढ़ाई जा रही है, जिससे हम भारतीय हर बात में विदेशी लोगों के विचार, दर्शन और संस्कृति को सर्वश्रेष्ठ मानकर स्वयं से व अपने पूर्वजों से घृणा करने लगते है । सत्ता-हस्तांतरण के इन 67 वर्षो के बाद भी यह घृणित व अपमानजनक षड़यन्त्र हमारी शिक्षा व्यवस्था में एक कलंक की तरह आज तक जारी है । हम इस षड़यन्त्र को पूरी तरह समाप्त कराकर सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था का भारतीयकरण करायेंगे ।

5. तथ्यों के आलोक में भारतीय इतिहास का पुर्नलेखन कराकर ताजमहल, कुतुबमीनार आदि प्राचीन भवनों के वास्तविक निर्माताओं को उनका श्रेय देकर भारत का सुप्त स्वाभिमान जगायेंगे तथा कालगणना के लिए युगाब्ध को अपनाकर राष्ट्रीय पंचांग के रूप में लागु करेंगे ।

(ख) चिकित्सा व्यवस्था - 1. देश की 90 से 99 प्रतिशत बीमारी की चिकित्सा या रोगों का उपचार हम अपनी परम्परागत चिकित्सा पद्धतियों से करेंगे । शल्य चिकित्सा या आपातकालीन चिकित्सा में ही हम विदेशी चिकित्सा पद्धतियों का आश्रय लेंगे । हम ऐलोपैथी की जीवन रक्षक दवाओं या आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के ज्ञान व अनुसंधान के विरोधी नहीं है । स्वदेशी उपचार स्थायी, सस्ता, सरल, सहज, निर्दोष, सर्वांगीण व पूर्ण वैज्ञानिक है तथा इससे प्रतिवर्ष हो रहे लाखों-करोडों रूपयों के आर्थिक दोहन व दुष्प्रभाव से भी देश को बचाना है । अंग्रेजों के शासन काल से ही तिरस्कार व उपेक्षा झेल रही स्वदेशी चिकित्सा विद्याओं का स्वतंत्र भारत की सरकारों ने भी घोर अपमान किया है । हम स्वदेशी चिकित्सा पद्धतियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे ।

2. हम जड़ी-बूटियों, आयुर्वेद, योग, पंचगव्य, प्राकृति चिकित्सा, सिद्ध व यूनानी आदि सम्पूर्ण भारतीय चिकित्सा पद्धतियों पर अनुसंधान को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर पूरे विश्व के चिकित्सा जगत में भारत की एक अति सम्मानजनक प्रतिष्ठा बनायेंगे ।

(ग) कानून व्यवस्था - 1. भारतीय नागरिकों में साम्प्रदायिक आधार पर भेद-भाव उत्पन्न करने वाले कानूनों को भंग कराके देश के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता की व्यवस्था कर समानता का अधिकार प्रदान करेंगे ।

2. देश के संविधान से अपमानजनक शब्द 'इंडिया' को हटवाकर भारत की पुर्नस्थापना करायेंगे तथा विवादस्पद शब्द 'राष्ट्रपिता' को प्रतिबंधित करवाकर भारत माँ के सम्मान की रक्षा करेंगे ।

3. भ्रष्टाचारी, बलात्कारी, आतंकवादी, मिलावट करने वाले तथा जहरीला प्रदूषण फैलाने वालों को मृत्युदण्ड या आजीवन कारावास जैसे कठोर दण्ड दिलाने के लिए नये कानून बनवाने और इन अपराधियों को सजा मिलने में देरी न हो इसके लिए जिला या राज्य स्तर पर विशेष न्यायालयों की स्थापना करवानी है जहाँ 2 से 3 महीने में सुनवाई पूर्ण करके दण्डात्मक कार्यवाही पूरी की जा सके । सज्जनों को सम्मान व संरक्षण तथा अपराधियों को दण्ड न मिलने के कारण ही देश में सामाजिक अन्याय, असुरक्षा व अविश्वास की भावना पैदा होती है ।

4.गौहत्या निषेध का कानून बनवाकर हम भारत माता के माथे से गौहत्या का कलंक मिटायेंगे । हम देशवासियों को भी परस्पर एक-दूसरे के सम्मान के लिए निर्दोष प्राणियों का मांस न खाने के लिए प्रेरित करेंगे । सबके लिए उपयोगी पवित्र पशु गाय जिसको अधिकांश भारतीय देवता मानकर पूजते है उस गाय का मांस न खाने से यदि करोड़ों भारतीयों (हिन्दुओं, सिक्खों, जैन व बौद्धों आदि) को सम्मान व प्रसन्नता मिलती है तो मुस्लिम समाज भी कम से कम भारत में इसका मांस न खाने का सामूहिक संकल्प लें । इस काम से ही देश में बहुत अधिक राष्ट्रीय एकता का भाव बढ़ेगा और निर्दोष प्राणियों की हत्या का सिलसिला भी रूकेगा ।

5. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटवायेंगे तथा कश्मीर के मूल निवासियों का जम्मू-कश्मीर में सुरक्षित पुर्नवास सुनिश्चित करायेंगे ।

(घ) अर्थ व्यवस्था - 1. हम रूपये का अवमूल्यन रोकने के लिए ऐसी नीतियां बनवायेंगे, जिससे रूपये को डालर व पौन्ड के बराबर लाया जा सके, जो लगभग 15 अगस्त 1949 के समय में था ।

2. हम स्वदेशी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए गौवंश एवं ग्राम आधारित स्वदेशी उद्योग लगवाकर रोजगार के नये अवसर उपलब्ध करवायेंगे तथा प्रतिवर्ष हो रहे देश के लाखों करोड रूपयों का दोहन बंद करायेंगे । साथ ही हम स्वदेशी अर्थव्यवस्था को अपनाकर अर्थात दूसरे देशों में निर्यात बढ़ाकर एवं आयात को घटाकर प्रतिवर्ष कम से कम 20 से 30 लाख करोड़ रूपये विदेशी मुद्रा भारत में लाकर देश को समृद्ध व वैभवशाली बनायेंगे ।

(ड) कृषि व्यवस्था - 1. जैविक कृषि हेतु प्रोत्साहन नीति बनाकर स्वस्थ व समृद्ध भारत के निर्माण हेतु प्रतिबद्ध रहेंगे । जैविक कृषि से विष रहित अन्न, शाक, सब्जियां व फलादि उपलब्ध होंगे जो हमारे स्वास्थ्य की रक्षा व राष्ट्र की रक्षा के लिए अति आवश्यक है ।

2. हम जल संरक्षण के परम्परागत व प्राकृतिक उपायों को अपनाकर जल की एक - एक बूंद को धरती के गर्भ में उतारने का पूर्ण प्रयास करेंगे तथा पर्यावरण के अनुकूल छोटे - छोटे बांधों की योजना पर कार्य करेंगे ।

3. हम कृषि के औद्योगीकरण, खाद्य-प्रसंस्करण व फसलों के मूल्यांकन की एक स्वस्व व नई नीति बनवायेंगे, जिससे खेती घाटे का सौदा न रहें, गाँवों से पलायन रूके, साथ ही किसान आत्महत्या के लिए मजबूर न हो ।


संक्षेप में हम सनातन संस्कृति संघ के द्वारा इस देश का नैतिक व चारित्रिक उत्थान करते हुए देश की समस्त भ्रष्ट व्यवस्थाओं, गलत नीतियों, साम्प्रदायिक असमानता व भ्रष्टाचार को मिटाकर बेरोजगारी, गरीबी, भूख, अभाव व अशिक्षा से मुक्त स्वस्थ, समृद्ध, शक्तिशाली एवं संस्कारवान भारत का पुनर्निर्माण करना चाहते है । वर्तमान व्यवस्था भ्रष्ट है परन्तु इसमें देशभक्त, ईमानदार व चरित्रवान लोग भी है, हम उनका हृदय से सम्मान करते है और आवाह्न करते है कि वे व्यवस्था परिवर्तन के इस आन्दोलन में तन-मन-धन से सहयोग करने के लिए पहल करें, संगठन से जुड़ें । सनातन संस्कृति संघ आपका हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करता हैं ।

सम्पर्क करें-

कार्यालय:- म. नं. 60, के. एच. 8/12/1, गली नं. 1-ए, शहीद भगत सिंह कालोनी, करावल नगर, दिल्ली - 110094 (भारत)

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